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महिला सशक्तिकरण की शक्तिशाली प्रतीक, देश की प्रथम महिला आदिवासी राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू..
राष्ट्र की जनसंख्या की कुल 8.9 प्रतिशत आदिवासी समुदाय की प्रतिनिधि, एवं महिला सशक्तिकरण की वैश्विक प्रतीक संघर्ष, जिजीविषा की जीती जागती प्रतिमूर्ति देश की 15वीं निर्वाचित राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू को देश की जनता का अभिवादन, सलाम।
नेशनल डेमोक्रेटिक एलाइंस की प्रत्याशी द्रौपदी मुर्मू ने विपक्ष के उम्मीदवार यशवंत सिन्हा को एकतरफा मुकाबले में हराने के साथ ही भारत की पहली आदिवासी राष्ट्रपति बनकर एक इतिहास का स्वर्णिम अध्याय लिख दिया। उन्हें यशवंत सिन्हा के खिलाफ 64% वोट प्राप्त हुए और यशवंत सिन्हा को पराजित कर वे राष्ट्रपति निर्वाचित घोषित की गई। द्रौपदी मुर्मू जी को 540 सांसदों सहित 2824 मतदाताओं का साथ मिला जबकि यशवंत सिन्हा को 208 सांसदों सहित 1877 मतदाताओं का समर्थन प्राप्त हुआ था।
यह भारत का सौभाग्य है की द्रौपदी मुर्मू जी देश की दूसरी महिला राष्ट्रपति एवं प्रथम अनुसूचित जनजाति की राष्ट्रपति निर्वाचित हुई है। उल्लेखनीय है कि इसके पूर्व राष्ट्रपति श्री राम कोविंद जी भी दलित समुदाय का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। यह सुखद संयोग है कि भारतीय महिलाओं के लिए 21 जुलाई एक विशेष दिन है इसके पूर्व 15 वर्ष पहले 21 जुलाई को ही श्रीमती प्रतिभा पाटिल देश की 12वीं राष्ट्रपति निर्वाचित हुई थी एवं 25 जुलाई को शपथ ग्रहण किया था। श्रीमती प्रतिभा पाटिल वर्ष 2005 से लेकर 2012 तक देश की राष्ट्रपति रही। इसी तरह श्रीमती द्रौपदी मुर्मू भी 25 जुलाई को शपथ ग्रहण करेंगी। श्रीमती मुर्मू 20 जून 1958 को सुपरबेड़ा जिला मयूरभंज उड़ीसा में जन्मी थी। वे देश की सबसे कम उम्र की राष्ट्रपति होंगी, इसके पूर्व कम उम्र के राष्ट्रपति होने का रिकॉर्ड डॉक्टर नीलम संजीव रेड्डी का 1977 में बना था जब वे निर्विरोध निर्वाचित राष्ट्रपति बने थे।
भारत में जनसंख्या के हिसाब से महिलाओं की आबादी पुरुषों के बराबर ही है यानी कि 50% है। द्रोपदी मुर्मू की जीत से महिला सशक्तिकरण को काफी बल तथा ऊर्जा मिलने वाली है। स्त्री सशक्तिकरण का एक स्पष्ट संदेश न सिर्फ महिलाओं में जाएगा बल्कि आदिवासी क्षेत्र में रहने वाले समूचे आदिवासी जगत में भी यह संदेश राष्ट्रीय एकता के रूप में जाने वाला है। यह आपको बता दूं देश में 47 लोकसभा तथा 487 विधानसभा की सीटों के लिए अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षण की सुविधा भारतीय संविधान ने उपलब्ध कराई गई है। देश की महिलाओं के लिए द्रौपदी मुरमू जी संघर्ष का एक बड़ा प्रतीक मानी जाती हैं। स्त्री सशक्तिकरण एवं महिलाओं की समाज में राजनीति में शासकीय सेवाओं में एवं अन्य क्षेत्रों में बराबर की भागीदारी को निश्चित तौर पर बल प्राप्त होने वाला है। यह भी सुखद संयोग है कि वर्तमान में देश के प्रधानमंत्री एवं नवनिर्वाचित राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू का जन्म स्वतंत्रता के बाद ही हुआ है। श्रीमती मुर्मू स्वतंत्रता के बाद पैदा होने वाली प्रथम राष्ट्रपति हैं, वे स्वतंत्रता प्राप्ति के लगभग 11 साल बाद पैदा हुई थी। इनके पूर्व जितने भी राष्ट्रपति थे वे सब स्वतंत्रता के पूर्व यानी 1947 के पूर्व ही जन्मे थे। अपनी राजनीतिक पार्षद पद से शुरू करके राष्ट्रपति तक बनने की गौरवशाली यात्रा करने वाली देश की प्रथम राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मू ही होंगी। देश में आदिवासी महिलाओं का सशक्त प्रतिनिधित्व करने वाली श्रीमती द्रौपदी मुर्मू तामझाम तथा तड़क-भड़क से दूर सीधे-साधे स्वभाव की महिला है। ब्रह्माकुमारी आश्रम के ध्यान तथा चिंतन की गहन अभ्यासी भी हैं वे मृदुभाषी तथा आध्यात्मिक प्रवृत्ति की महिला हैं, उल्लेखनीय है कि श्रीमती मुर्मू उपरबेड़ा जैसे छोटे गांव में जन्म लेकर पार्षद से लेकर रायरंगपुर कि 2 बार विधायक रह कर उड़ीसा में दो बार मंत्री पद भी संभाला है, उसके पश्चात वे झारखंड में राज्यपाल भी रही पर अपने व्यक्तिगत जीवन में उन्होंने काफी अवसाद भी झेले हैं। उन्होंने गंभीर अध्यात्म एवं चिंतन उस समय शुरू किया जब 2009 से लेकर 2015 तक 6 वर्षों की अवधि में अपने दो पुत्रों, पति, माता तथा अपने भाई को खोया था। व्यक्तिगत क्षति होने के बाद उन्होंने अध्यात्म और चिंतन के दम पर अपने आप को संभाला एवं सार्वजनिक जीवन में प्रवेश कर महिला सशक्तिकरण की आवाज को बुलंद किया। इसके पश्चात दो बार मंत्री रह कर झारखंड की राज्यपाल भी बनी, उसके पश्चात अब वे राष्ट्र का सर्वोच्च पद महामहिम राष्ट्रपति का गरिमामय पद संभालेंगीं, यह राष्ट्र के लिए अत्यंत गौरव का विषय है की एक दलित आदिवासी संघर्षशील महिला छोटे गांव से उठ कर राष्ट्र के सर्वोच्च पद को संभालने का गौरव प्राप्त कर रही हैं। निसंदेह देश की करोड़ों महिलाओं के लिए वे एक बड़े ही प्रेरणा एवं ऊर्जा का स्रोत होंगी, एवं युवा वर्ग की महिलाओं बेटियों के लिए वह एक आदर्श महिला की तरह भी स्थापित हो चुकी हैं।
उन्हें हम सबका विनम्र अभिवादन एवं शुभकामनाएं।
(लेखक संजीव ठाकुर रायपुर छत्तीसगढ़ के जाने माने स्तंभकार हैं जो कि ऑनरेरी हमारे साथ जुड़े हैं।)
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