
गाजियाबाद (13 नवंबर 2019)- यूं तो ब्योरोक्रेसी और जन प्रतिनिधि होते ही जनता के हितों की रक्षा और सेवा करने के लिए। लेकिन अक्सर इनमें तालमेल और टकराव की वजह निजी ही होती हैं। जिनमें टकराव तो देखने को मिलता ही रहता है। इन दिनों गाजियाबाद नगर निगम का भी हाल कुछ ऐसा ही है।
दरअसल नगर निगम के टैक्स विभाग में लगभग 50करोड़ के घोटाले के सिलसिले में मेयर आशा शर्मा द्वारा निगम अधिकारियों पर लगाए गए गंभीर आरोप के बाद भाजपा के ही पार्षदों ने उनके आरोपों पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। सदन में भाजपा पार्षद दल के नेता राजेंद्र त्यागी व सचेतक हिमांशु मित्तल ने मंगलवार को कहा है कि यदि इन आरोपों के पक्ष में मेयर के पास सुबूत हैं तो वह पेश करें । इस तरह की बयानबाजी से ना केवल नगर निगम की मर्यादा को ठेस पहुंच रही है बल्कि नगर निगम अधिकारियों और पार्षदों का मनोबल भी गिर रहा है ।
आपको बता दें कि मेयर आशा शर्मा ने पिछले दिनों शासन को एक पत्र लिखा था जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि नगर निगम में अधिकारियों व कर्मचारियों की मिलीभगत के कारण टैक्स में भारी घोटाला किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि नगर निगम के कर्मचारी पहले बड़े संस्थानों को बड़ी रकम का बिल भेजते हैं उसके बाद मोटी रिश्वत लेकर उसको कम कर देते हैं।इतना ही नहीं कई बड़े संस्थानों से टैक्स लिया भी नहीं जा रहा है। महापौर ने इस संबंध में पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है। पत्र में उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उन्होंने कर निर्धारण अधिकारी संजीव सिन्हा से कई बार मौखिक रूप से इस पूरे प्रकरण से अवगत कराया लेकिन आज तक इस को लेकर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। जिसका मतलब यह है कि अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच में मिलीभगत है । उन्होंने यह भी बताया कि पिछले दिनों नंद ग्राम इलाके में एक कर्मचारी को रंगे हाथों जनता की मदद से उन्होंने खुद पकड़ा था उन्होंने अधिकारियों को अवगत कराया था लेकिन उसके बावजूद भी उसके खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई ।
उधर भाजपा पार्षद दल के नेता पार्षद राजेंद्र त्यागी व सचेतक हिमांशु मित्तल ने आज इस मामले को बयान देकर और हवा दे दी। जिसमें उन्होंने साफ तौर पर मेरे द्वारा लगाए गए आरोपों पर सवालिया निशान लगाते हुए मेयर से जवाब मांगा कि यदि उनके पास टैक्स घोटाले से संबंधित कोई साक्ष्य है तो उसे सार्वजनिक करें या फिर सदन की बैठक बुलाई जाए और उसमें उन साक्ष्यों को पेश करें ताकि यह गंभीर मामला जनता के सामने आ सके और शासन प्रशासन को पूरा सदन इससे अवगत करा सकें । हिमांशु मित्तल ने भी कुछ इसी तरह के सवाल उठाए हैं और राजेंद्र त्यागी के सुर में सुर मिलाते हुए कहा है कि मेयर का पद सम्मानित पद है । इस तरह के बयान देने से पहले उन्हें साक्ष्य प्रस्तुत करने चाहिए थे अगर कहीं घोटाला हुआ है तो पूरे पार्षद मेयर के साथ है लेकिन उन्हें साक्ष्य देने होंगे ।
गौरतलब है कि पिछले काफी दिनों से किसी ना किसी मुद्दे पर मेयर व नगर आयुक्त के बीच तनातनी चलती आ रही है आशा शर्मा ने पिछले दिनों नगर आयुक्त के ट्रांसफर को लेकर शासन को एक पत्र भी लिखा था जिसमें उन्होंने नगर आयुक्त की कार्यशैली को खराब बताते हुए उन पर अमर्यादित टिप्पणी भी की थी । जिसको लेकर नगर आयुक्त ने पत्र का जवाब भी दिया था । जिसमें आरोपों को सिरे से ख़ारिज कर दिया था। बहरहाल इस तरह नगर निगम इस समय मेयर व अधिकारियों के बीच जंग का मैदान बन चुका है और आम आदमी में इसका अच्छा मैसेज नहीं जा रहा है। लोगों का कहना है कि इस मामले में यदि कहीं दोनों के बीच कहीं मतभेद है तो उसको बैठकर हल करना चाहिए ना कि सड़कों पर लाना चाहिए ।
उधर मेयर आशा शर्मा ने दोनों भाजपा पार्षदों द्वारा सवाल उठाने के बाद बयान जारी किया है जिसमें उन्होंने कहा है कि मेरे पास टैक्स चोरी के पूरे सुबूत हैं और मैं अपने साथियो से उम्मीद करती हूँ कि वे नगर निगम में भ्रष्टाचार के खिलाफ शिर्डी गई लड़ाई में उनका साथ देंगे।
उधर नगर आयुक्त दिनेश चंद्र का कहना है कि उनके कार्यकाल को केवल आठ महीने हुए हैं और इस दौरान 30हजार से ज्यादा कर दाताओं की संख्या में बढ़ोतरी हुई है और पिछले साल के इसी समय की तुलना
में 36करोड़ का इजाफा हुआ है । साथ ही उन्होंने यह भी कहा है कि यदि मेयर इस संबंध में कोई साक्ष्य देती हैं तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी ।