
नई दिल्ली (15 अक्तूबर 2019)- अयोध्या मामले पर आखिरी दिन सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन द्वारा अयोध्या मामले से सम्बंधित एक नक्षे को भरी अदालत में फाड़े जाने पर युनाईटेड हिन्दू फ्रंट ने गहरी नाराजगी जताते हुए इसे हिन्दु भावनाओं का अपमान बताया है। हिंदू यूनाइटेड फ्रंट ने वकील राजीव धवन पर कानूनी कार्यवाही की मांग उच्चतम न्यायालय, बार काउंसिल ऑफ इंडिया व राश्ट्रपति महोदय से की है।
फ्रंट द्वारा जारी एक प्रेस वक्तव्य में बाबरी मस्जिद विध्वंस के मुख्य अभियुक्त और सर्वप्रथम जिम्मेदारी लेने वाले फ्रंट के अंतर्राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष जय भगवान गोयल ने कहा कि राजीव धवन का यह अनैतिक कृत्य सुप्रीम कोर्ट की अपमान है। साथ ही हिन्दुओं की आस्थाओं के केन्द्र अयोध्या का अपमान कर हिन्दु समाज को उत्तेजित करने का भी एक षड़यंत्र है। उन्होंने कहा कि हिन्दु महासभा के वकील द्वारा जो नकषा सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत किया जा रहा था उसमें ब्रटिष कार्यकाल के दौरान वर्ष 1860 में विवादित स्थल पर सिर्फ भगवान श्री राम मंदिर व जन्म स्थान के संदर्भ में ही दर्षाया गया है जबकि बाबर व मुस्लिमों का वहां कुछ भी नहीं दर्षाया गया। जय भगवान गोयल का कहना है कि यह देख कर ही मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन भड़क उठे और हिन्दुओं को उत्तेजीत करने के लिए ऐसा अनैतिक कार्य किया।
श्री गोयल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सभी पक्षों ने अपने अपने सबूत प्रस्तुत किए है और इसी कड़ी में ही हिन्दु महासभा के वकील ने भी श्री राम मंदिर के संदर्भ में अपना यह सबूत पेष किया था। उन्होंने कहा कि सबूत को स्वीकारना या अस्वीकारना माननीय उच्चतम न्यायालय का कार्य था। श्री गोयल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने जिस प्रकार से अयोध्या मामले की सुनवाई समय से पूर्व पूरी की है और हिन्दु पक्षकारों के वकीलों द्वारा मजबूती के साथ अपने साक्ष्य व दलीले रखी गई है और मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन पूरी तरह से बौखला गए है और उन्हें इस बात का अंदाजा है कि फैसला हिन्दुओं के ही पक्ष में जाएगा, इसी का ही नतीजा है कि वकील राजीव धवन द्वारा यह कानून विरोधी अनैतिक कार्य किया गया। उन्होंने उच्चतम न्यायालय, बार काउंसिल ऑफ इंडिया और राष्ट्रपति महोदय से मांग करते हुए कहा कि ऐसी मानसिकता वाले वकील की तुरंत सदस्यता समाप्त कर तत्काल कड़ी कानूनी कार्यवाही की जाएं।
गौरतलब है कि स्वंतत्र भारत में संविधान के निर्माण और सुप्रीमकोर्ट की मौजूदगी का सबसे गंभीर और विवादित मामले बाबरी मस्जिद बनाम राम मंदिर विवाद में इंसाफ के लिए लोगों की नजरें सुप्रीमकोर्ट की तरफ टिकी हैं। दरअसल सुप्रीमकोर्ट और सरकारी आश्वासनों के बावजूद 6 दिसंबर 1992 को जो कुछ हुआ उसके बाद से ही दुनियां की नज़रे की देश की सबसे बड़ी अदालत यानि सुप्रीमकोर्ट पर लगीं हैं।